DLS Method in Cricket in Hindi: DLS नियम क्या है और कैसे काम करता है?

क्रिकेट प्रेमियों के लिए मैच के बीच में बारिश का आना किसी बुरे सपने से कम नहीं होता। जब भी कोई रोमांचक वनडे (ODI) या टी-20 (T20) मैच बारिश की वजह से रुकता है, तो टीवी स्क्रीन पर एक नया टारगेट दिखने लगता है और कॉमेंटेटर्स एक भारी-भरकम शब्द का इस्तेमाल करने लगते हैं— DLS Method

लेकिन आखिर यह DLS Method क्या है? यह कैसे तय करता है कि बारिश के बाद कौन सी टीम जीतेगी या नया टारगेट क्या होगा? अगर आप भी क्रिकेट के फैन हैं और इस उलझन भरे नियम को आसान भाषा में समझना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। इस लेख में हम DLS Method (डकवर्थ-लुईस-स्टर्न नियम) के इतिहास, इसके काम करने के तरीके और इसके पीछे के गणित को विस्तार से समझेंगे।

DLS Method क्या है?

DLS का फुल फॉर्म Duckworth-Lewis-Stern (डकवर्थ-लुईस-स्टर्न) है। यह सीमित ओवरों के क्रिकेट (ODI और T20I) में बारिश या किसी अन्य कारण से मैच रुकने पर, दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए एक नया (संशोधित) लक्ष्य (Target) तय करने का एक गणितीय फॉर्मूला (Mathematical Formulation) है।

इस नियम का मुख्य उद्देश्य दोनों टीमों के लिए मैच को निष्पक्ष (Fair) बनाना है, ताकि बारिश के कारण खेल के ओवर कम होने पर किसी भी एक टीम को अनुचित फायदा या नुकसान न हो।

DLS Method का इतिहास और जरूरत (History and Need of DLS)

DLS नियम के आने से पहले, क्रिकेट में बारिश से प्रभावित मैचों का नतीजा निकालने के लिए Average Run Rate (ARR) या Most Productive Overs जैसे नियमों का इस्तेमाल होता था। लेकिन ये नियम अक्सर हास्यास्पद और बेहद अनफेयर नतीजे देते थे।

इसका सबसे कुख्यात उदाहरण 1992 के विश्व कप का सेमीफाइनल है, जो दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच खेला गया था। बारिश से पहले दक्षिण अफ्रीका को जीतने के लिए 13 गेंदों में 22 रन चाहिए थे। बारिश के बाद, पुराने नियम के हिसाब से टारगेट को बदल दिया गया और दक्षिण अफ्रीका को 1 गेंद में 22 रन बनाने का असंभव लक्ष्य दे दिया गया। इस घटना ने क्रिकेट जगत को झकझोर दिया और एक नए, निष्पक्ष नियम की मांग उठने लगी।

डकवर्थ और लुईस का आगमन

इस समस्या को सुलझाने के लिए दो ब्रिटिश सांख्यिकीविदों (Statisticians), फ्रैंक डकवर्थ (Frank Duckworth) और टोनी लुईस (Tony Lewis) ने एक नया गणितीय मॉडल तैयार किया। इसे 1997 में पहली बार लागू किया गया और 1999 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने इसे आधिकारिक तौर पर अपना लिया। तब इसे ‘Duckworth-Lewis (DL) Method’ कहा जाता था।

डकवर्थ और लुईस के साथ ‘स्टर्न’ का जुड़ना

समय के साथ क्रिकेट बदला, टी-20 फॉर्मेट आया और 300+ रन बनाना आम बात हो गई। ऐसे में पुराने DL मेथड को अपडेट करने की जरूरत महसूस हुई। 2014 में, एक ऑस्ट्रेलियाई प्रोफेसर स्टीवन स्टर्न (Steven Stern) ने इस फॉर्मूले को आधुनिक क्रिकेट (विशेषकर हाई-स्कोरिंग मैचों) के हिसाब से अपडेट किया। तब से इसका नाम बदलकर Duckworth-Lewis-Stern (DLS) Method कर दिया गया।

DLS Method काम कैसे करता है? (How DLS Method Works?)

DLS नियम का पूरा गणित दो मुख्य ‘संसाधनों’ (Resources) पर टिका हुआ है। क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाजी करने वाली टीम के पास रन बनाने के लिए मुख्य रूप से दो ही साधन होते हैं:

  1. बचे हुए ओवर्स (Overs Remaining)
  2. बचे हुए विकेट (Wickets in Hand)

जब मैच शुरू होता है (50 ओवर के मैच में), तो टीम के पास 50 ओवर और 10 विकेट होते हैं, यानी उनके पास 100% Resources होते हैं।

जैसे-जैसे टीम ओवर खेलती है और विकेट खोती है, उनके संसाधनों (Resources) का प्रतिशत कम होता जाता है। DLS फॉर्मूला एक कॉम्प्लेक्स टेबल (DLS Table) का उपयोग करता है जो यह बताता है कि किसी भी निश्चित ओवर और विकेट के नुकसान पर टीम के पास कितने प्रतिशत संसाधन बचे हैं।

DLS के तहत लक्ष्य कैसे तय होता है?

DLS के माध्यम से लक्ष्य का निर्धारण बहुत सी परिस्थितियों पर निर्भर करता है,आइए इसे अलग-अलग स्थितियों (Scenarios) से समझते हैं:

स्थिति 1: पहली पारी के दौरान बारिश (Rain during the 1st Innings) मान लीजिए टीम A ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 40 ओवर में 4 विकेट खोकर 200 रन बनाए। तभी बारिश आ जाती है और पारी वहीं समाप्त करनी पड़ती है।

  • अब टीम B को 40 ओवर खेलने हैं।
  • लेकिन टीम B को शुरू से पता है कि उन्हें सिर्फ 40 ओवर खेलने हैं, इसलिए वे 50 ओवर खेलने वाली टीम A की तुलना में ज्यादा आक्रामक खेल सकते हैं।
  • ऐसे में DLS नियम टीम B के लिए टारगेट को थोड़ा बढ़ा देता है (Scale up), क्योंकि उनके पास 40 ओवरों के लिए पूरे 10 विकेट (ज्यादा Resources) मौजूद हैं।

स्थिति 2: दूसरी पारी के दौरान बारिश (Rain during the 2nd Innings) मान लीजिए टीम A ने 50 ओवर में 250 रन बनाए। टीम B ने 30 ओवर में 3 विकेट खोकर 150 रन बना लिए हैं और तभी बारिश आ जाती है। मैच आगे नहीं खेला जा सकता।

  • यहाँ DLS ‘Par Score’ (पार स्कोर) की गणना करता है।
  • DLS यह देखता है कि 30 ओवर और 3 विकेट के नुकसान पर, क्या टीम B ने उतने रन बना लिए हैं जितने टीम A ने उसी स्थिति में बनाए होते?
  • अगर टीम B का स्कोर DLS ‘Par Score’ से ज्यादा है, तो टीम B को विजेता घोषित किया जाता है। अगर कम है, तो टीम A जीतती है।

DLS नियम के लिए न्यूनतम ओवर्स की शर्त (Minimum Overs Rule)

मैच का नतीजा निकालने के लिए DLS नियम तभी लागू किया जा सकता है जब खेल के दोनों पारियों में कम से कम एक निश्चित संख्या में ओवर फेंके गए हों:

  • वनडे इंटरनेशनल (ODI): दोनों पारियों में कम से कम 20 ओवर फेंके जाने चाहिए।
  • टी-20 इंटरनेशनल (T20I): दोनों पारियों में कम से कम 5 ओवर फेंके जाने चाहिए।

अगर बारिश के कारण दूसरी पारी में इतने न्यूनतम ओवर भी नहीं फेंके जा पाते हैं, तो मैच को ‘रद्द’ (No Result) घोषित कर दिया जाता है।

DLS Method के फायदे और आलोचनाएं (Pros and Cons)

फायदे (Pros):

  • निष्पक्षता: यह अब तक का सबसे वैज्ञानिक और निष्पक्ष नियम है जो विकेट और ओवर दोनों को महत्व देता है।
  • बल्लेबाजी और गेंदबाजी का संतुलन: यह सुनिश्चित करता है कि बारिश के कारण किसी एक पक्ष (गेंदबाज या बल्लेबाज) को अनुचित लाभ न मिले।

आलोचनाएं (Cons):

  • समझने में मुश्किल: आम क्रिकेट फैंस के लिए इसका गणित समझना बहुत मुश्किल है। स्क्रीन पर अचानक आए टारगेट को देखकर अक्सर फैंस कंफ्यूज हो जाते हैं।
  • दबाव की गणना नहीं: DLS एक गणितीय फॉर्मूला है। यह मैच के मानसिक दबाव, पिच के बदलते मिजाज या किसी खास गेंदबाज के खौफ को संख्या में नहीं नाप सकता।

हालांकि DLS Method पूरी तरह से अचूक (Perfect) नहीं है और कभी-कभी इसके परिणाम अटपटे लग सकते हैं, लेकिन क्रिकेट के इतिहास में यह बारिश से प्रभावित मैचों का फैसला करने का अब तक का सबसे बेहतरीन सिस्टम है। इसने क्रिकेट को 1992 विश्व कप जैसी शर्मनाक स्थितियों से बचाया है और खेल को अधिक तार्किक बनाया है। जैसे-जैसे डेटा साइंस आगे बढ़ेगा, हो सकता है भविष्य में इसमें और भी सुधार देखने को मिलें।

DLS का फुल फॉर्म क्या है?

DLS का फुल फॉर्म Duckworth-Lewis-Stern (डकवर्थ-लुईस-स्टर्न) है। पहले इसे केवल डकवर्थ-लुईस (DL) कहा जाता था, लेकिन 2014 में प्रोफेसर स्टीवन स्टर्न द्वारा इस फॉर्मूले को आधुनिक क्रिकेट के हिसाब से अपडेट किए जाने के बाद, इसमें ‘S’ (Stern) जोड़ दिया गया।

क्रिकेट में DLS नियम कब लागू होता है?

यह नियम वनडे (ODI) और टी-20 मैचों में बारिश या खराब मौसम के कारण खेल रुकने और ओवर्स में कटौती होने पर लागू किया जाता है।

क्या DLS मेथड टेस्ट क्रिकेट में भी इस्तेमाल होता है?

नहीं, DLS मेथड केवल सीमित ओवरों के क्रिकेट (ODI और T20) के लिए बनाया गया है; यह टेस्ट क्रिकेट में लागू नहीं होता है।

DLS नियम लागू करने के लिए कम से कम कितने ओवर खेले जाने ज़रूरी हैं?

मैच का नतीजा DLS से निकालने के लिए वनडे में दोनों टीमों का कम से कम 20-20 ओवर और टी-20 में 5-5 ओवर खेलना अनिवार्य है।

DLS नियम पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कब इस्तेमाल किया गया था?

डकवर्थ-लुईस (डी/एल) नियम का पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रयोग 1 जनवरी, 1997 को जिम्बाब्वे और इंग्लैंड के बीच दूसरे वनडे मैच के दौरान किया गया था।

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